“सफलता अक्सर पहली कोशिश में नहीं मिलती। लेकिन जो हर असफलता के बाद फिर से खड़ा हो जाता है, वही अंततः इतिहास बनाता है।”
आज भारत में स्टार्टअप संस्कृति (Startup Ecosystem) की चर्चा होती है, तो 91Springboard का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। हजारों स्टार्टअप, फ्रीलांसर, उद्यमी और इनोवेटर्स इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा चुके हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, लगातार असफलताएँ और बार-बार नई शुरुआत करने का साहस छिपा हुआ है।
91Springboard के संस्थापक वरुण चावला (Varun Chawla) की कहानी केवल एक सफल कंपनी बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि यदि आप सीखना नहीं छोड़ते, तो असफलताएँ भी आपकी सबसे बड़ी शिक्षक बन जाती हैं।
परिचय
आज 91Springboard भारत के प्रमुख Co-working Space और Startup Community Platforms में गिना जाता है। इसके विभिन्न शहरों में कार्यालय हैं, जहाँ स्टार्टअप्स, फ्रीलांसर, छोटे व्यवसाय और बड़ी कंपनियाँ एक ही छत के नीचे काम करती हैं। लेकिन शुरुआत में इसका उद्देश्य केवल ऑफिस किराए पर देना नहीं था।
वरुण चावला का सपना था कि भारत में एक ऐसा मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाया जाए, जहाँ नए उद्यमियों को केवल कार्यस्थल ही नहीं, बल्कि नेटवर्क, मेंटरशिप, निवेशकों से जुड़ने के अवसर और सीखने का वातावरण भी मिले। यही सोच आगे चलकर 91Springboard की पहचान बनी।
कौन हैं वरुण चावला?
वरुण चावला ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर की शुरुआत दुनिया की प्रतिष्ठित निवेश बैंक Goldman Sachs से की। वहाँ उन्होंने कई वर्षों तक काम किया और एक सफल कॉर्पोरेट करियर बनाया।
Goldman Sachs जैसी कंपनी में नौकरी करना अधिकांश लोगों का सपना होता है। अच्छी सैलरी, सुरक्षित भविष्य और प्रतिष्ठित पहचान—सब कुछ उनके पास था।
लेकिन वरुण चावला केवल नौकरी करना नहीं चाहते थे। उनके मन में हमेशा यह इच्छा थी कि वे अपना कुछ ऐसा बनाएँ जो लोगों के लिए मूल्य (Value) पैदा करे और भारत के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान दे।
इसी सोच ने उन्हें एक ऐसा निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया, जिसे अधिकांश लोग जोखिम भरा मानते।
उन्होंने अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली।
आरामदायक नौकरी छोड़ना आसान नहीं था
किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़ना केवल आर्थिक निर्णय नहीं होता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक चुनौती भी होती है।
नौकरी छोड़ने के बाद व्यक्ति के सामने कई सवाल खड़े हो जाते हैं—
- यदि व्यवसाय सफल नहीं हुआ तो क्या होगा?
- नियमित आय कहाँ से आएगी?
- परिवार का क्या होगा?
- लोग क्या कहेंगे?
- क्या सही निर्णय लिया है?
वरुण चावला ने भी इन सभी अनिश्चितताओं का सामना किया। लेकिन उन्होंने अपने सपनों को सुरक्षित नौकरी से बड़ा माना।
यही निर्णय आगे चलकर उनकी पूरी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ।
पहली बार बिजनेस शुरू किया… लेकिन सफलता नहीं मिली
अधिकांश लोग सोचते हैं कि सफल उद्यमी पहली ही कंपनी में सफल हो जाते हैं।
वास्तविकता बिल्कुल अलग होती है।
वरुण चावला ने भी उद्यमिता की शुरुआत की, लेकिन शुरुआती प्रयास उम्मीद के अनुसार सफल नहीं हुए।
उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में स्टार्टअप शुरू किए।
कुछ बिजनेस मॉडल टिक नहीं पाए।
कुछ में बाज़ार ने साथ नहीं दिया।
कुछ में सही समय नहीं मिला।
और कुछ में उनसे रणनीतिक गलतियाँ भी हुईं।
लेकिन एक बात उन्होंने कभी नहीं छोड़ी—
सीखना।
हर असफल स्टार्टअप उनके लिए एक नया बिजनेस स्कूल बन गया।
लगातार असफलताएँ… फिर भी हार नहीं मानी
उद्यमिता का सबसे कठिन समय वह होता है जब एक के बाद एक प्रयास असफल होने लगते हैं।
कई लोग पहली असफलता के बाद हार मान लेते हैं।
कुछ दूसरी के बाद।
लेकिन वरुण चावला ने लगातार असफलताओं को अपनी पहचान नहीं बनने दिया।
उन्होंने हर बार खुद से केवल एक सवाल पूछा—
“इस बार मैंने क्या सीखा?”
यही प्रश्न उन्हें हर बार अगली शुरुआत करने की ताकत देता रहा।
बाद में उन्होंने स्वयं कई मंचों पर स्वीकार किया कि शुरुआती असफलताओं ने उन्हें ग्राहकों की जरूरत, बाज़ार की वास्तविकता, टीम निर्माण, पूँजी प्रबंधन और बिजनेस मॉडल की महत्ता को गहराई से समझाया।
एक स्टार्टअप का सफल अधिग्रहण
लगातार संघर्षों के बीच उनकी एक पहल MyGuestHouse ने बेहतर प्रदर्शन किया।
यह प्लेटफ़ॉर्म यात्रा और आवास से जुड़ा एक ऑनलाइन व्यवसाय था, जिसे बाद में एक अन्य कंपनी ने अधिग्रहित (Acquisition) कर लिया।
हालाँकि यह बहुत बड़ी आर्थिक सफलता नहीं थी, लेकिन इससे वरुण चावला का आत्मविश्वास वापस आया।
उन्हें यह विश्वास हो गया कि वे सही दिशा में सोच रहे हैं और यदि लगातार सीखते रहे, तो एक दिन बड़ी सफलता अवश्य मिलेगी।
यही अनुभव आगे चलकर 91Springboard की नींव रखने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
सफलता की असली शुरुआत अभी बाकी थी…
तीन अलग-अलग उद्यमों से मिले अनुभवों ने वरुण चावला को एक महत्वपूर्ण बात सिखाई—
भारत के स्टार्टअप्स को केवल फंडिंग की नहीं, बल्कि एक मजबूत समुदाय (Community), सही नेटवर्क और सहयोगी कार्य वातावरण की भी आवश्यकता है।
यहीं से जन्म हुआ एक ऐसे विचार का जिसने आगे चलकर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपनी अलग पहचान बनाई—
91Springboard।
तीन असफलताओं ने सिखाया सबसे बड़ा सबक
लगातार बिजनेस शुरू करने और उनसे मिले अनुभवों ने वरुण चावला की सोच पूरी तरह बदल दी थी। अब उन्हें यह समझ आने लगा था कि किसी स्टार्टअप की सफलता केवल एक अच्छे आइडिया पर निर्भर नहीं करती।
कई बार अच्छे आइडिया केवल इसलिए सफल नहीं हो पाते क्योंकि—
- सही लोगों का साथ नहीं मिलता।
- अनुभवी मेंटर्स तक पहुँच नहीं होती।
- निवेशकों से मिलने का अवसर नहीं मिलता।
- शुरुआती खर्च (Fixed Cost) बहुत अधिक होता है।
- उद्यमी अकेलेपन और अनिश्चितता से जूझता रहता है।
वरुण ने महसूस किया कि भारत में हजारों प्रतिभाशाली लोग हैं, लेकिन उन्हें एक ऐसे वातावरण की आवश्यकता है जहाँ वे सीख सकें, नेटवर्क बना सकें और अपने व्यवसाय को विकसित कर सकें।
यहीं से एक नए विचार ने जन्म लेना शुरू किया।
91Springboard का विचार कैसे आया?
आज अधिकांश लोग 91Springboard को केवल एक Co-working Space के रूप में जानते हैं।
लेकिन शुरुआत में इसकी कल्पना कुछ अलग थी।
वरुण चावला एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाना चाहते थे जहाँ—
- स्टार्टअप्स एक-दूसरे से सीख सकें।
- अनुभवी उद्यमी नए संस्थापकों का मार्गदर्शन करें।
- निवेशकों और संस्थापकों के बीच संपर्क बने।
- नई कंपनियों को शुरुआती संसाधन आसानी से मिल सकें।
- एक मजबूत Startup Community तैयार हो।
दूसरे शब्दों में, उनका लक्ष्य केवल ऑफिस उपलब्ध कराना नहीं था बल्कि एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना था जहाँ उद्यमी एक-दूसरे की सफलता में योगदान दें।
बाद में इसी सोच ने 91Springboard की सबसे बड़ी पहचान बनाई।
👉 Co-working Space Business Idea in Hindi: क्या है, कैसे शुरू करें, निवेश, कमाई और पूरी जानकारी
Co-working Space क्यों चुना?
जब किसी नए स्टार्टअप की शुरुआत होती है तो सबसे बड़ी समस्याओं में से एक होती है—
ऑफिस का खर्च।
यदि कोई नई कंपनी अलग से ऑफिस किराए पर लेती है, तो उसे कई खर्च उठाने पड़ते हैं—
- किराया
- फर्नीचर
- इंटरनेट
- बिजली
- मीटिंग रूम
- रिसेप्शन
- सुरक्षा
- रखरखाव
एक छोटे स्टार्टअप के लिए यह सब काफी महँगा साबित होता है।
वरुण चावला ने सोचा—
यदि एक ही जगह पर कई स्टार्टअप काम करें, तो सभी का खर्च कम होगा और साथ ही वे एक-दूसरे से सीख भी सकेंगे।
यही विचार आगे चलकर Co-working Model की नींव बना।
पहला सेंटर शुरू करना भी आसान नहीं था
आइडिया अच्छा था।
लेकिन वास्तविक चुनौती अब शुरू हुई।
सबसे पहले जगह (Space) ढूँढना।
फिर उसे विकसित करना।
फिर लोगों को समझाना कि वे अपना अलग ऑफिस छोड़कर साझा कार्यस्थल (Shared Workspace) में क्यों काम करें।
उस समय भारत में Co-working का कॉन्सेप्ट आज जितना लोकप्रिय नहीं था।
कई लोग इस मॉडल को समझ ही नहीं पाते थे।
कुछ कहते—
“क्या दूसरे लोगों के साथ बैठकर कोई कंपनी चला सकता है?”
कुछ को गोपनीयता की चिंता थी।
कुछ को लगता था कि इससे उनकी कंपनी की पेशेवर छवि प्रभावित होगी।
इसलिए शुरुआती ग्राहकों को जोड़ना सबसे कठिन काम था।
लोगों को केवल ऑफिस नहीं, एक Community मिली
धीरे-धीरे जिन्होंने 91Springboard को अपनाया, उन्हें एहसास हुआ कि यहाँ केवल एक डेस्क या कुर्सी नहीं मिलती।
उन्हें मिलता था—
- नए ग्राहकों से जुड़ने का अवसर।
- संभावित सह-संस्थापक (Co-founders) से मिलने का मौका।
- निवेशकों तक पहुँच।
- उद्योग विशेषज्ञों से बातचीत।
- नियमित Networking Events।
- Workshops और Learning Sessions।
- Startup Meetups।
यहीं से 91Springboard की सबसे बड़ी ताकत सामने आई।
यह केवल Workspace नहीं रहा।
यह एक Startup Community बन गया।
बिजनेस मॉडल में बदलाव बना गेम चेंजर
अक्सर सफल कंपनियाँ शुरुआत वाले आइडिया पर नहीं, बल्कि समय के साथ किए गए सही बदलावों पर खड़ी होती हैं।
91Springboard भी इसका उदाहरण है।
शुरुआत में कंपनी का फोकस Startup Accelerator और Community Building पर अधिक था।
लेकिन टीम ने जल्दी ही समझ लिया कि यदि पहले एक मजबूत Workspace Network बनाया जाए, तो उसी के माध्यम से Community अपने आप विकसित होगी।
उन्होंने ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को समझा।
यही कारण था कि कंपनी ने अपने मॉडल को व्यवहारिक बनाया।
यानी—
पहले लोगों को बेहतरीन कार्यस्थल दो, फिर उन्हें एक-दूसरे से जोड़ो।
यह निर्णय आगे चलकर कंपनी की सबसे बड़ी सफलता का आधार बना।
धीरे-धीरे बढ़ने लगी पहचान
पहले कुछ महीनों में वृद्धि बहुत तेज़ नहीं थी।
लेकिन एक बात लगातार हो रही थी—
जो लोग 91Springboard का हिस्सा बनते, वे दूसरों को भी इसकी सलाह देते।
Word of Mouth Marketing ने कंपनी की पहचान बढ़ानी शुरू कर दी।
स्टार्टअप्स ने महसूस किया कि यहाँ काम करने से—
- खर्च कम होता है।
- सहयोग बढ़ता है।
- सीखने के अवसर मिलते हैं।
- नए व्यावसायिक संबंध बनते हैं।
यही कारण था कि धीरे-धीरे विभिन्न शहरों से भी माँग आने लगी।
एक अलग पहचान बनाने का निर्णय
भारतीय बाजार में केवल ऑफिस स्पेस देना पर्याप्त नहीं था।
वरुण चावला चाहते थे कि 91Springboard को लोग केवल एक रियल एस्टेट कंपनी के रूप में न देखें।
इसलिए उन्होंने कंपनी की पहचान बनाई—
“Workspace + Community + Learning + Networking”
यही सोच उन्हें दूसरे कई Co-working ब्रांड्स से अलग करती गई।
आज भी 91Springboard की चर्चा केवल उसकी जगहों (Locations) के कारण नहीं होती, बल्कि उसके मजबूत Startup Ecosystem के कारण भी होती है।
सबसे महत्वपूर्ण सीख
वरुण चावला ने यह साबित किया कि—
कई बार आपकी सबसे बड़ी सफलता, आपकी पिछली असफलताओं से मिले अनुभवों पर ही खड़ी होती है।
यदि वे पहले तीन असफल स्टार्टअप्स से निराश होकर उद्यमिता छोड़ देते, तो शायद 91Springboard जैसी कंपनी कभी अस्तित्व में नहीं आती।
उनकी कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी होती है।
भारत के कई शहरों तक पहुँचा 91Springboard
शुरुआती सफलता मिलने के बाद 91Springboard ने धीरे-धीरे अपने नेटवर्क का विस्तार करना शुरू किया। कंपनी ने केवल एक शहर तक सीमित रहने के बजाय भारत के प्रमुख स्टार्टअप हब्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
समय के साथ इसके सेंटर दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, नोएडा, गुरुग्राम, गोवा और अन्य प्रमुख शहरों तक पहुँचने लगे।
लेकिन कंपनी का लक्ष्य केवल नए कार्यालय खोलना नहीं था।
हर नए सेंटर के साथ वह स्थानीय स्टार्टअप समुदाय को मजबूत बनाने का प्रयास भी करती रही। नियमित नेटवर्किंग इवेंट, स्टार्टअप मीटअप, निवेशकों से बातचीत, कार्यशालाएँ और सीखने के कार्यक्रम इसकी पहचान बन गए।
यही कारण था कि बहुत-से स्टार्टअप्स के लिए 91Springboard केवल एक ऑफिस नहीं बल्कि एक बिजनेस कम्युनिटी बन गया।
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केवल किराए का ऑफिस नहीं, अवसरों का प्लेटफ़ॉर्म
कई Co-working कंपनियाँ केवल कार्यस्थल उपलब्ध कराती हैं।
लेकिन 91Springboard ने स्वयं को इससे अलग बनाया।
यदि कोई नया उद्यमी यहाँ आता था, तो उसे केवल एक डेस्क नहीं मिलती थी।
उसे मिलते थे—
- समान सोच वाले उद्यमी
- संभावित ग्राहक
- निवेशकों से मिलने के अवसर
- अनुभवी मेंटर्स
- सीखने के कार्यक्रम
- बिजनेस नेटवर्क
- सहयोगी वातावरण
यही Community-Driven Model कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बना।
बदलते समय के साथ खुद को भी बदला
व्यवसाय की दुनिया लगातार बदलती रहती है।
नई तकनीक आती है।
ग्राहकों की आवश्यकताएँ बदलती हैं।
बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
ऐसे समय में केवल वही कंपनियाँ टिक पाती हैं जो समय के साथ स्वयं को भी बदलती रहें।
91Springboard ने भी यही किया।
कंपनी ने बदलती जरूरतों के अनुसार अपनी सेवाओं में सुधार किया, डिजिटल सुविधाएँ बढ़ाईं, लचीली सदस्यता योजनाएँ विकसित कीं और समुदाय-केंद्रित गतिविधियों को और मजबूत बनाया।
यही कारण रहा कि वर्षों बाद भी उसकी पहचान बनी रही।
नेतृत्व जिसने कंपनी को अलग बनाया
वरुण चावला का नेतृत्व पारंपरिक शैली से थोड़ा अलग माना जाता है।
वे केवल कंपनी बढ़ाने की बात नहीं करते थे।
वे ऐसा वातावरण बनाना चाहते थे जहाँ दूसरे लोग भी सफल हो सकें।
उनकी सोच थी—
यदि आपके साथ जुड़े स्टार्टअप सफल होंगे, तभी आपका प्लेटफ़ॉर्म भी वास्तव में सफल माना जाएगा।
यही सोच 91Springboard को एक सामान्य कार्यालय प्रदाता बनने से रोकती रही और उसे Startup Ecosystem का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती गई।
संघर्षों ने जो सिखाया
यदि हम वरुण चावला की पूरी यात्रा देखें, तो सबसे बड़ी बात यह सामने आती है—
उन्होंने सफलता से अधिक असफलताओं से सीखा।
उन्होंने तीन महत्वपूर्ण बातें कभी नहीं छोड़ीं—
- सीखना
- दोबारा प्रयास करना
- परिस्थितियों के अनुसार बदलना
यही तीन आदतें अंततः उनकी सबसे बड़ी पूँजी बन गईं।
इस कहानी से मिलने वाली 20 महत्वपूर्ण सीख
- सुरक्षित नौकरी छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन बड़े सपनों के लिए कभी-कभी बड़े निर्णय लेने पड़ते हैं।
- पहली असफलता अंतिम नहीं होती।
- लगातार सीखते रहने वाला व्यक्ति आगे बढ़ता है।
- ग्राहक की वास्तविक समस्या समझना सबसे महत्वपूर्ण है।
- अच्छा नेटवर्क कई बार पूँजी से भी अधिक मूल्यवान होता है।
- सही लोगों के साथ काम करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
- बिजनेस मॉडल बदलने से डरना नहीं चाहिए।
- परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को बदलना आवश्यक है।
- धैर्य हर उद्यमी की सबसे बड़ी ताकत है।
- सफलता धीरे-धीरे बनती है।
- केवल पैसा कमाना ही व्यवसाय का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
- समुदाय (Community) बनाना लंबे समय में सबसे बड़ा निवेश हो सकता है।
- गलतियों को स्वीकार करना विकास की शुरुआत है।
- अनुभव किसी भी डिग्री से अधिक मूल्यवान हो सकता है।
- हर असफल प्रयास भविष्य की सफलता की तैयारी हो सकता है।
- बड़े लक्ष्य छोटे-छोटे कदमों से पूरे होते हैं।
- नेतृत्व का अर्थ दूसरों को आगे बढ़ाना भी है।
- जोखिम उठाए बिना असाधारण सफलता मुश्किल होती है।
- निरंतर सुधार (Continuous Improvement) व्यवसाय की पहचान बनाता है।
- सफलता मंज़िल नहीं, बल्कि लगातार सीखने की यात्रा है।
निष्कर्ष
91Springboard की कहानी यह नहीं बताती कि सफलता केवल अच्छे विचार से मिल जाती है।
यह कहानी बताती है कि—
सही विचार + लगातार सीखना + असफलताओं से न घबराना + समय के अनुसार स्वयं को बदलना = दीर्घकालिक सफलता।
वरुण चावला ने यह सिद्ध किया कि यदि कोई व्यक्ति असफलताओं को अपनी पहचान बनाने के बजाय अपनी शिक्षा बना ले, तो एक दिन वही अनुभव उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं।
91Springboard की यात्रा हमें यह भी सिखाती है कि उद्यमिता केवल पैसा कमाने का माध्यम नहीं है। यह समस्याओं का समाधान खोजने, लोगों को जोड़ने और ऐसा वातावरण बनाने की प्रक्रिया है जहाँ अनेक अन्य लोग भी अपने सपनों को साकार कर सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 91Springboard क्या है?
91Springboard भारत के प्रमुख Co-working Space और Startup Community Networks में से एक है, जहाँ स्टार्टअप्स, फ्रीलांसर, छोटे व्यवसाय और कंपनियाँ साझा कार्यस्थल तथा नेटवर्किंग के अवसर प्राप्त करती हैं।
2. 91Springboard के संस्थापक कौन हैं?
91Springboard की स्थापना वरुण चावला (Varun Chawla) ने की थी।
3. क्या वरुण चावला पहले Goldman Sachs में कार्य करते थे?
हाँ। उद्यमिता शुरू करने से पहले उन्होंने Goldman Sachs में कार्य किया था और बाद में अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए नौकरी छोड़ दी।
4. क्या 91Springboard से पहले उनके स्टार्टअप असफल हुए थे?
हाँ। उन्होंने कई उद्यम शुरू किए, जिनमें सभी सफल नहीं रहे। उन्हीं अनुभवों ने आगे चलकर 91Springboard की नींव मजबूत की।
5. 91Springboard की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
यह केवल Co-working Space नहीं, बल्कि एक Startup Community है जहाँ उद्यमियों को नेटवर्किंग, सीखने, सहयोग और विकास के अवसर भी मिलते हैं।
6. इस कहानी से सबसे बड़ी सीख क्या मिलती है?
असफलता अंत नहीं होती। यदि आप हर असफलता से सीखकर आगे बढ़ते रहते हैं, तो वही संघर्ष एक दिन आपकी सबसे बड़ी सफलता की नींव बन सकता है।
“हर महान सफलता के पीछे कई ऐसी असफलताएँ होती हैं जिन्हें दुनिया कभी देख नहीं पाती। इसलिए असफलता से डरिए मत, उससे सीखिए और आगे बढ़ते रहिए।”
👉 Co-working Space Business Idea in Hindi: क्या है, कैसे शुरू करें, निवेश, कमाई और पूरी जानकारी
📚 अधिक जानकारी (Further Reading)
यदि आप 91Springboard, इसके संस्थापक वरुण चावला, भारत के Co-working Industry, Startup Ecosystem और कंपनी की विकास यात्रा के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए विश्वसनीय स्रोतों का अध्ययन कर सकते हैं।
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